भावार्थ एवं दार्शनिक विश्लेषण
"यह मेरा है और वह पराया है—ऐसी संकीर्ण सोच तुच्छ हृदय वाले लोगों की होती है। उदार हृदय वाले महापुरुषों के लिए तो यह सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार के समान है।"
महोपनिषद् (६.७१-७२) का यह श्लोक भारतीय दर्शन की उदारता और वैश्विक भ्रातृत्व का सर्वोच्च शिखर है। यह भौगोलिक और वैचारिक संकीर्णताओं को तोड़कर संपूर्ण मानवजाति को एक कुटुंब मानता है।
दैनिक जीवन में उपयोगिता एवं मार्गदर्शन
Penerapan dalam Kehidupan Nyata
जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटती दुनिया में यह विचार हमें परस्पर सद्भाव, सहानुभूति और सहयोग से जीने का पाठ पढ़ाता है।
इतिहास, द्रष्टा ऋषि एवं वैदिक संदर्भ
यह श्लोक भारत की विदेश नीति, संस्कृति और जी-२० (G20) सम्मेलन का आधिकारिक आदर्श वाक्य ('एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य') रहा है।
Metrum / Chhandas: Anushtubh
Aspek Ketuhanan (Devata): Vishva-Kutumba