मित्रस्याहं चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षे । मित्रस्य चक्षुषा समीक्षामहे ॥
Mitrasyāhaṃ cakṣuṣā sarvāṇi bhūtāni samīkṣe | mitrasya cakṣuṣā samīkṣāmahe ||

📖 भावार्थ एवं दार्शनिक विश्लेषण

"Shukla Yajurveda 36.18 का यह पावन मंत्र हमें Universal Brotherhood और सृष्टि के शाश्वत नियम (ऋत) के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। यह परमसत्ता और जीवन के दिव्य स्वरूप का वंदन करता है।"

यह दिव्य ऋचा Yajurveda से उद्भूत है, जिसके द्रष्टा Rishi Yajnavalkya हैं और मुख्य देवता Mitra (Sahabat Kasih Sayang) हैं। वैदिक संस्कृति में यह श्लोक मनुष्य और ब्रह्मांड के अटूट आध्यात्मिक संबंध को रेखांकित करता है तथा चेतना को उच्चतर सत्य की ओर अग्रसर करता है।

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🧭 दैनिक जीवन में उपयोगिता एवं मार्गदर्शन

Penerapan dalam Kehidupan Nyata

दैनिक जीवन में यह मंत्र हमें Universal Brotherhood के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करता है। तनाव, संशय और नैतिक दुविधाओं के समय इसका ध्यान मन को शांति, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प प्रदान करता है।

🏛️ इतिहास, द्रष्टा ऋषि एवं वैदिक संदर्भ

वैदिक परंपरा की अमूल्य धरोहर के रूप में Shukla Yajurveda 36.18 का यह मंत्र युगों-युगों से ऋषियों और मुनियों द्वारा संजोया गया है। यह सनातन दर्शन की सार्वभौमिक प्रज्ञा का प्रतीक है।

Metrum / Chhandas: Yajur Prose

Aspek Ketuhanan (Devata): Mitra (Sahabat Kasih Sayang)

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