भावार्थ एवं दार्शनिक विश्लेषण
"हे परमात्मा! हमें असत्य से सत्य की ओर ले चलो; अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले चलो; और मृत्यु के भय से अमरता की ओर ले चलो।"
बृहदारण्यक उपनिषद् (१.३.२८) का यह पावन मन्त्र मानव चेतना की सर्वोच्च अभीप्सा है। यह सांसारिक नश्वरता और भ्रम से पार पाकर शाश्वत आत्मतत्त्व के साक्षात्कार की पुकार है।
दैनिक जीवन में उपयोगिता एवं मार्गदर्शन
Penerapan dalam Kehidupan Nyata
दैनिक जीवन में आत्मनिरीक्षण हेतु यह सर्वोत्तम मार्गदर्शक है। जब भी मन में भ्रम, निराशा या नैतिक द्वंद्व हो, यह मन्त्र हमें सत्य और प्रकाश का चयन करने का आत्मबल देता है।
इतिहास, द्रष्टा ऋषि एवं वैदिक संदर्भ
यह मन्त्र सहस्रों वर्षों से भारतीय विद्यालयों, गुरुकुलों और प्रार्थना-सभाओं में नित्य उच्चारित होता आ रहा है और वैश्विक फलक पर मानवता का साझा प्रार्थना-गीत बन चुका है।
Metrum / Chhandas: Upanishadic Verse
Aspek Ketuhanan (Devata): Brahman