पश्येम शरदः शतं जीवेम शरदः शतं बुध्येम शरदः शतं रोहेम शरदः शतं पूषेम शरदः शतं भवेम शरदः शतम् ॥
Paśyema śaradaḥ śataṃ jīvema śaradaḥ śataṃ budhyema śaradaḥ śataṃ rohema śaradaḥ śataṃ pūṣema śaradaḥ śataṃ bhavema śaradaḥ śatam ||

📖 भावार्थ एवं दार्शनिक विश्लेषण

"Atharvaveda 19.67.1 का यह पावन मंत्र हमें Peace & Healing और सृष्टि के शाश्वत नियम (ऋत) के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। यह परमसत्ता और जीवन के दिव्य स्वरूप का वंदन करता है।"

यह दिव्य ऋचा Atharvaveda से उद्भूत है, जिसके द्रष्टा Rishi Atharvan हैं और मुख्य देवता Ayus (Umur Panjang) हैं। वैदिक संस्कृति में यह श्लोक मनुष्य और ब्रह्मांड के अटूट आध्यात्मिक संबंध को रेखांकित करता है तथा चेतना को उच्चतर सत्य की ओर अग्रसर करता है।

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🧭 दैनिक जीवन में उपयोगिता एवं मार्गदर्शन

Penerapan dalam Kehidupan Nyata

दैनिक जीवन में यह मंत्र हमें Peace & Healing के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करता है। तनाव, संशय और नैतिक दुविधाओं के समय इसका ध्यान मन को शांति, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प प्रदान करता है।

🏛️ इतिहास, द्रष्टा ऋषि एवं वैदिक संदर्भ

वैदिक परंपरा की अमूल्य धरोहर के रूप में Atharvaveda 19.67.1 का यह मंत्र युगों-युगों से ऋषियों और मुनियों द्वारा संजोया गया है। यह सनातन दर्शन की सार्वभौमिक प्रज्ञा का प्रतीक है।

Metrum / Chhandas: Yajur / Atharva Prose

Aspek Ketuhanan (Devata): Ayus (Umur Panjang)

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